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अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
खाद्य सुरक्षा और उसके संरक्षण
की जानकारी और जननिक विविधता को
बांटने सार्वभौमिक और क्षेत्रीय
सम्बन्धों के महत्व को समझतें हुए, भारत दूसरे देशों और अंतर्राष्ट्रीय रूप
से प्रसिद्व कृषि अनुसंधान संस्थाओं के साथ अधिक नजदीकी संबंध विकसित करने
के संयुक्त प्रयास करता रहा -है। डेयर के आई. सी प्रभाग भारत में कृषि
अनुसंधान तथा शिक्षा के क्षेत्र में
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के निए
नोडल अभिकरण है।
विभाग कृषि अनुसंधान के
विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए द्विपक्षीय अनुसंधान परियोजनाओं, समझौता
ज्ञापन और कर्मयोजनाओं के माध्यम
सें विदेशी सरकारों यू, एन, सी जी आई ए और अन्य बहुपक्षीय अभिकरणों से
सम्पर्क करता है खाध सुरक्षा और
सोसाइटी को आर्थिक विकास सुनिश्चित करने में इन परियोजनाओं की प्रत्यक्ष
प्रासंगिकता है।
भारत की
हरित क्रान्ति को किसी हद तक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए सुखद परिणाम माना
जा सकता है। भारत ने अपनी ओर से दूसरे देशों को खाध सुरक्षा प्राप्ति करने
में सहायता की है। दक्षिण में दक्षिण
की सहयोग भावना को ध्यान में रखते हुए विभाग नें कई देशों के साथ
सहयोग को विकसित किया है। कृषि
अनुसंधान परियोजनाओं के संवंध मे डेयर की भागीदारी भारत सरकार के अन्य
मंत्रालयों जैसे के वित्त विदेशी कार्य, वाणिज्य, विज्ञान व प्रौद्योगिकी के
द्वारा भी होती है। वर्तमान में विभाग के पास विभिन्न देशों/
एजेन्सियों/संस्थानों 40 से अधिक समझौता ज्ञापन/ सहयोग की कार्य
योजनाएँ हैं।
भारत
असंख्य अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानो जैसे सी. जी. आई. ए. आर., सी. जी. पी. आर टी,
एन. ए. सी. ए. बी.की अंतर्राष्ट्रीय ए पी ए ए आर आई तथा आई एस एच एस का सदस्य है।
डेयर
विभिन्न भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों/ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के
संस्थानों में विदेशी विद्यार्थियों के प्रवेश का भी समन्वय करता है। चूकिं
भारत कम लागत पर गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करता है, भारत में कृषि और
सम्बद्व विषय में अध्ययन करने वाले
विदेशी विद्यार्थियों की सख्या में तेजी से वृद्वि हो रही है। आइ सी प्रभाग
का अन्य महत्वपूर्ण कार्य भारतीय कृषि वैज्ञानिकों के कौशल को निरन्तर अघतन
बनाने में सहायता प्रदान करना है।
विभाग एन. ए. आर. एस. के वैज्ञानिकों के लिए अनेक प्रशिक्षक कार्यक्रमों का समन्वय
करता है , विशेषकर प्रौघोगिकी के नवीनतम व उभरतें क्षेत्रों में।
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